Monday, March 14, 2011

शोरे- दिल

नारी में  गर जीभ  न होती ! दुनिया बे-तरतीब न होती !!
याद करो, आदि से अब तक ! नारी जब भी, कुछ बोली है !!
धरती पे कुछ अजाब घटा है ! खून की जग, खेला होली है !! 
कोई जंग नसीब न होती ! नारी में  गर जीभ  न होती ! दुनिया बे-तरतीब न होती !!
सतयुग में, रावण जैसे को ! वाक-बाण सीता ने मारे !
द्वापर में भी, बीच सभा के ! पंचाली, दुर्योधन ललकारे !!
सूरत कोई अजीब न होती !  नारी में  गर जीभ  न होती ! दुनिया बे-तरतीब न होती !!
( भगवान् की कोई भूल ब्याँ करने की छोटी सी कोशिश की है ! आप अपनी राय दे सकते हैं !  )
होली के रंग तमाम, तुम्हें कर श्रृंगार दें !
होली पे दिल से, हम ये दुआ बार-बार दें !! 

Wednesday, March 9, 2011

वलवले

निकाह नेकी, तलाक लानत है !
ज़िन्दगी प्यार की, अमाबत है !!
तर्क-ए-ताल्लुक के बाद, शादी क्यूँ !
शादी बेवा से कुछ, दयानत है !!

प्यार शादी से पहले धोखा  है !
बाद शादी के किसने रोका है !!
यूँ ही बेकार न गँवा देना !
ज़िन्दगी इक सुनहरी मौका है !!   

Saturday, March 5, 2011

वलवले

नेकियाँ करना, तुम्हारा काम  है !
ऐ खुदा, मुझको बदी  से बाज़ रख !!

हर एक दिन की, शुरुआत इस कसम से करो !
भला, हुआ तो करेंगे, बुरा, करेंगे नहीं !! 

जिस पे मुझको कभी शुब्हा न रहा ! 
वो कभी मेरा, राजदां  न रहा !!
उस पर इतना यकीन था कामिल !
दिल का हर मामला उसी से कहा !!

वलवले

नेकियाँ करना, तुम्हारा कम है !
ऐ खुदा, मुझको बड़ी से बाज़ रख !!

हर एक दिन की, शुरुआत इस कसम से करो !
भला, हुआ तो करेंगे, बुरा, करेंगे नहीं !! 

जिस पे मुझको कभी शुब्हा न रहा ! 
वो कभी मेरा, राजदां  न रहा !!
उस पर इतना यकीन था कामिल !
दिल का हर मामला उसी से कहा !!

Thursday, March 3, 2011

वलवले

अनोखा इक तजुर्बा कर रहा हूँ ! मगर मैं दिल ही दिल में डर रहा हूँ !!
किये अपने पे पछताना पड़े ना  ! बिछुड़ अपनो से हुई जाना पड़े ना !!
मैं रुसवाई को शायद सह सकूं ना ! मैं हाल-ए-दिल भी शायद कह सकूं ना !!
मेरे मौला कभी वो दिन ना आये ! मेरा ईमान हो छिन्न -भिन्न ना जाए !!
मेरी मुश्किल को तुम आसान करना ! ना दिल टूटे मेरा, एहसान करना !!
मैं ज़ज्बों पे भरोसा कर रहा हूँ ! मैं बाहों में समंदर भर रहा हूँ !!  

Tuesday, March 1, 2011

जवानी जा चुकी, जाने कहाँ है !
तम्मानाएँ अभी तक भी जवाँ हैं !!
हाँ सब-कुछ समझ आने लगा है !
जो चाहो वो नहीं मिलता यहाँ है !!
खुदा का हमशक्ल बेशक है बंदा !
खुदा हर दिल में करता घर कहाँ है !!
जो सब में है बसा जाने वो इक दिन !
जिस्म को छोड़ के जाता कहाँ है !!