Wednesday, April 6, 2011

वलवले

कोई ऐसा मिला ही नहीं |  जिसको कोई गिला ही नहीं ||
दूरियां हैं , दिलों में मगर | दरम्याँ, फासला ही नहीं ||  
जब जो होना था होकर रहा | हमसे कुछ भी टला ही नहीं ||
आग नफरत की जलती रही | प्यार उसमे, जला ही नहीं ||
सबको तकदीर से है गिला | क्यूँ 'शशि' से मिला ही नहीं ||

Tuesday, April 5, 2011

वलवले

कद से किरदार की पहचान कहाँ होती है |
झूठ में सच सी, निहाँ शान कहाँ होती है||
जिनकी तामीर में, खुदगर्जी हो मक्कारी हो |
ऐसे रिश्तों में भला जान कहाँ होती है ||

वलवले

मैंने ख़्वाबों में ख्वाब देखे हैं |
बहुत ही लाजवाब देखे हैं ||
सिर्फ तारे नहीं दिखे दिन में |
रात में आफ़ताब देखे हैं ||

वलवले

अगर इतना ही कहना था, अज़नबी फिर से बन जाएँ |
बिछुड़ कर तुमसे जीने से, तो बहतर है, की मर जाएँ ||
तुम्हारी आँख में कल तक, हमारे ख्वाब बसते थे |
हमारे नाम की तस्बीह, तुम दिन-रात जाप्ते थे ||
अचानक हो गया है क्या, ज़रा हमको भी समझाएं | बिछुड़ कर तुमसे जीने से
सजा-ए-मौत से  बढकर, सजा-ए-ज़िन्दगी दे दी |
ज़माने को दिखाने के लिए, शर्मिंदगी दे दी ||
संभलना चाहते तो हैं, मगर शायद संभल पायें | बिछुड़ कर तुमसे जीने से 
तुम्हारा फैसला है, हम, भला क्यूँ बरतरफ़ कर दें |
हमारी खुशनसीबी है, की हम खुद को सर्फ़ कर दें || 
नहीं कहता 'शशि' की,फैसले को, फिर से दोहरायें | बिछुड़ कर तुमसे जीने से 

वलवले

जो होता है, अच्छा होता | दिल को यह समझा कर देखो ||
हैरत में सब पड़ जाओगे | थोडा सा ग़म खा कर देखो ||
सुर में खुद ही आ जाओगे | दिल से कुछ भी गा कर देखो ||
रिश्ते, जीने को, कहते हैं | रिश्ते नए बना कर देखो ||
रिश्तों को, बिलकुल मत परखो |नुस्खा यह आजमा कर देखो ||
हर दिन ही दीवाली होगी | खुशियाँ जरा लुटा कर देखो || 
तारीखी न कहीं मिलेगी | खुद को, ख़ुद बहला कर देखो ||
राहत सी महसूस करोगे |तन्हाई में जाकर देखो ||
तपती धुप से बच जाओगे | ख़ुद को छावँ बना कर देखो ||
मंजिल पास ही आ जायेगी | पहला कदम उठा कर देखो ||
मायूसी, ना हाथ, लगेगी | पास 'शशि' के आ कर देखो  ||

Monday, April 4, 2011

वलवले

जी रहा, हर आदमी है, बस इसी उम्मीद पर |
बंदगी से, एक दिन, बंदा, खुदा हो जाएगा ||
चच्चा ग़ालिब ने तुज़ुरबा, है किया कुछ यूँ बयाँ |
दर्द जब हद से बढेगा, खुद दवा हो जाएगा ||
टॉस करके फैसला करना,अगर्चा शौक है |
शौक यह ही देखना, इक दिन  जुआ हो जाएगा ||  

वलवले

जब भी वादा वफ़ा नहीं होता | क्यूँ तू, मुझसे खफा नहीं होता ||
कैसी मुश्किल हो, कैसा मौका हो | तू कभी होश क्यूँ नहीं खोता ||
बात हैरान करने वाली है | कम तेरा, होंसला, नहीं होता ||
क्यूँ  समझते हो, एक सा सबको | एक सा दूसरा नहीं होता || 
बख्श देते हो हर किसी की खता | ऐब यह भी, खरा नहीं होता || 
नक्ल करते हो, क्यूँ फरिश्तों की | आदमी देवता नहीं होता ||
'शशि' तुम क्यूँ, गिला नहीं करते | बोझ दिल पर, भला नहीं होता ||