Tuesday, March 1, 2011

जवानी जा चुकी, जाने कहाँ है !
तम्मानाएँ अभी तक भी जवाँ हैं !!
हाँ सब-कुछ समझ आने लगा है !
जो चाहो वो नहीं मिलता यहाँ है !!
खुदा का हमशक्ल बेशक है बंदा !
खुदा हर दिल में करता घर कहाँ है !!
जो सब में है बसा जाने वो इक दिन !
जिस्म को छोड़ के जाता कहाँ है !! 

Sunday, February 20, 2011

वलवले

जिसकी सूरत दिल-ए-तस्कीन का बाईस यही कभी !
उसकी  आवाज़  भी,  सुनने  को  तरस   जाते  हैं !!
खुद  को ले  जाते  हैं, यादों  की  हसीं  वादी  में !!
दिल को, इस तरह से, हम, इन दिनों बहलाते हैं !!

Thursday, February 10, 2011

walwaley

उसने मुझसे, कमाल चाहा है !
गीत इक बे-मिसाल चाहा है !!
न नया हो, नया सा लगता हो !
कोई ऐसा ख्याल चाहा है !!

Wednesday, February 9, 2011

शोर-ए-दिल

हम जिन्हें, भूल  तक नहीं पाये  !
वो कभी, ख्वाब में, नहीं आये  !!
याद ताज़ा है, गो हुई मुद्दत १
दूरीयाँ, दूर, कर नहीं पाये !!
दिल इसी खौफ, से परेशां है १
आस की डोर, टूट न जाए !!
साथ सदियों का है, जो कहते थे !
दो कदम साथ, चल नहीं पाये !!
क्या करें, कुछ, समझ नहीं आता !
दिल 'शशि' किस तरह से, बहलायें !!   

Friday, February 4, 2011

शोरे-दिल on the eve of retirement

सफ़र सर्विस का है जैसे गुजारा !
रहेगा उम्र भर यह याद सारा !!
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मुझे फुर्सत मिली है, काम से अब !
रहूँगा मैं, बड़े आराम से अब !!
गुजारिश यह मेरी मंज़ूर कर लो !
गिले-शिकवे दिलों से दूर कर लो !!
महरबाँ आज मुझ पर, है बहुत रब्ब !

मुझे फुर्सत मिली है, काम से अब !
रहूँगा मैं, बड़े आराम से अब !
जो मुझसे बन पड़ा, मैंने किया है !
आपके, साथ का भी, शुक्रिया है !!
ख़ुशी से अलविदा, कहना मुझे सब !

मुझे फुर्सत मिली है, काम से अब !!
रहूँगा मैं, बड़े आराम से अब !

Saturday, January 15, 2011

वलवले

पानी बने और बह गए, आँखों से, जो थे ख्वाब !
जब, तल्खिये हयात से, दो-चार हो गये !!
मंजिल करीब आई तो, हालात यूँ बने !
मंजिल की और जाने से, लाचार हो गये !!

Monday, January 3, 2011

वलवले

कोई किसी का नहीं इंतज़ार करता है !
किसी के साथ कोई, कब ख़ुशी से मरता है !!
वो मुझसे दूर ही रहते हैं , पर गिला कैसा !
मेरा ही साया, मेरे साथ से भी डरता है !!
मुझे खबर है, उसे भी अजीब लगता है !
वफ़ा की राह से, कतरा के, जो गुजरता है !!
न जान उसको अनाड़ी, जो बहरे दुनियाँ में !
बड़े यकीं से, सहारे बिना उतरता है !!
ज़हाँ आग का दरिया है, जिस्म सोना है ! 
'शशि' जो इसमें, है तपता, वही निखरता है !!