पानी बने और बह गए, आँखों से, जो थे ख्वाब !
जब, तल्खिये हयात से, दो-चार हो गये !!
मंजिल करीब आई तो, हालात यूँ बने !
मंजिल की और जाने से, लाचार हो गये !!
Saturday, January 15, 2011
Monday, January 3, 2011
वलवले
कोई किसी का नहीं इंतज़ार करता है !
किसी के साथ कोई, कब ख़ुशी से मरता है !!
वो मुझसे दूर ही रहते हैं , पर गिला कैसा !
मेरा ही साया, मेरे साथ से भी डरता है !!
मुझे खबर है, उसे भी अजीब लगता है !
वफ़ा की राह से, कतरा के, जो गुजरता है !!
न जान उसको अनाड़ी, जो बहरे दुनियाँ में !
बड़े यकीं से, सहारे बिना उतरता है !!
ज़हाँ आग का दरिया है, जिस्म सोना है !
'शशि' जो इसमें, है तपता, वही निखरता है !!
किसी के साथ कोई, कब ख़ुशी से मरता है !!
वो मुझसे दूर ही रहते हैं , पर गिला कैसा !
मेरा ही साया, मेरे साथ से भी डरता है !!
मुझे खबर है, उसे भी अजीब लगता है !
वफ़ा की राह से, कतरा के, जो गुजरता है !!
न जान उसको अनाड़ी, जो बहरे दुनियाँ में !
बड़े यकीं से, सहारे बिना उतरता है !!
ज़हाँ आग का दरिया है, जिस्म सोना है !
'शशि' जो इसमें, है तपता, वही निखरता है !!
Thursday, December 30, 2010
नव-वर्ष
कबूल, मेरी दुआओं के, फूल फरमाएं !
नए बरस की मुबारक काबुल फरमाएं !!
आना नए-बरस का, हो आपको मुबारक !
हर दिन हो, ईद जैसा, हर रात हो दीवाली !!
नए-बरस से उमीदें नई-नई रखना !
नए-बरस में, नया कुछ ज़रूर होता है !!
नए-बरस में हो, खुशियों की आप पर बारिश !
खुदा से, अब के बरस, बस यही गुजारिश है !!
नया-नया सा लगे, यह तो ऐन मुमकिन है !
नया, नया ही लगे, यह कहाँ ज़रूरी है !!
नए बरस की मुबारक काबुल फरमाएं !!
आना नए-बरस का, हो आपको मुबारक !
हर दिन हो, ईद जैसा, हर रात हो दीवाली !!
नए-बरस से उमीदें नई-नई रखना !
नए-बरस में, नया कुछ ज़रूर होता है !!
नए-बरस में हो, खुशियों की आप पर बारिश !
खुदा से, अब के बरस, बस यही गुजारिश है !!
नया-नया सा लगे, यह तो ऐन मुमकिन है !
नया, नया ही लगे, यह कहाँ ज़रूरी है !!
Friday, December 10, 2010
वलवले
बहुत मायूस हूँ और थक चुका हूँ !गिरने वाला हूँ शायद पाक चुका हूँ !!
बहुत देखी है, मैंने राह तेरी ! कलेजे पर मैं, पत्थर रख चुका हूँ !!
नहीं बस में मेरे तुझको भुलाना ! मज़ा उल्फत का तेरी चख चुका हूँ !!
कहूँ क्या हाल है, तुझसे बिछुड़ के ! मैं अपने ज़ख्म सारे ढक चुका हूँ !!
न जाने क्यूँ ये साँसे चल रहीं हैं ! जहाँ को अपनी आँखों तक चुका हूँ !!
'शशि' की आह निकली बे-असर ही ! नमाजें की हैं, रोज़े रख चुका हूँ !!
बहुत देखी है, मैंने राह तेरी ! कलेजे पर मैं, पत्थर रख चुका हूँ !!
नहीं बस में मेरे तुझको भुलाना ! मज़ा उल्फत का तेरी चख चुका हूँ !!
कहूँ क्या हाल है, तुझसे बिछुड़ के ! मैं अपने ज़ख्म सारे ढक चुका हूँ !!
न जाने क्यूँ ये साँसे चल रहीं हैं ! जहाँ को अपनी आँखों तक चुका हूँ !!
'शशि' की आह निकली बे-असर ही ! नमाजें की हैं, रोज़े रख चुका हूँ !!
Thursday, December 9, 2010
वलवले
बहुत रिश्तों को, शर्मिंदा किया है ! सिर्फ नफरत को ही, जिंदा किया है !!
न जाने किस वहम से दर गया वो ! किया कब, सबका पसंदीदा किया है !!
अकाल से कम लो, गैरत से पूछो ! किया अच्छा है, या गन्दा किया है !!
बहुत खुदगर्ज़ हो,और बे-हया हो ! किया जो कुछ भी है, मंदा किया है !!
नहीं होगा नफा, नुक्सान होगा ! यह किसकी अकाल से, धंधा किया है !!
'शशि' को ठीक ही कहती है दुनियाँ ! तुझे ज़ज्बात ने, अँधा किया है !!
न जाने किस वहम से दर गया वो ! किया कब, सबका पसंदीदा किया है !!
अकाल से कम लो, गैरत से पूछो ! किया अच्छा है, या गन्दा किया है !!
बहुत खुदगर्ज़ हो,और बे-हया हो ! किया जो कुछ भी है, मंदा किया है !!
नहीं होगा नफा, नुक्सान होगा ! यह किसकी अकाल से, धंधा किया है !!
'शशि' को ठीक ही कहती है दुनियाँ ! तुझे ज़ज्बात ने, अँधा किया है !!
Wednesday, December 8, 2010
भूख
भूख बागी है, भूख लानत है ! जिंदगी भूख की अमानत है !!
भूख बढती ही है, बढाने से ! इसको बढ़ने न दो बहाने से !!
भूख बर्दाश्त जो नहीं होती ! इसमें कुव्वत ही वो नहीं होती !!
भूख दौलत की, खा गयी अस्मत ! भूख शोहरत की खा गयी, इज्ज़त !!
भूख इंसानियत की, दुश्मन है ! भूख से ही, बिगड़ते बंधन हैं !!
भूख पैदा करे है, पापों को ! भूख, सुनाने न दे आलापों को !!
भूख बहरा बनाये, बन्दों को ! भूख बे-खौफ खाये चंदों को !!
भूख शैतान की भी खाला है ! जिसने उलझन में सबको डाला है !!
भूख बढती ही है, बढाने से ! इसको बढ़ने न दो बहाने से !!
भूख बर्दाश्त जो नहीं होती ! इसमें कुव्वत ही वो नहीं होती !!
भूख दौलत की, खा गयी अस्मत ! भूख शोहरत की खा गयी, इज्ज़त !!
भूख इंसानियत की, दुश्मन है ! भूख से ही, बिगड़ते बंधन हैं !!
भूख पैदा करे है, पापों को ! भूख, सुनाने न दे आलापों को !!
भूख बहरा बनाये, बन्दों को ! भूख बे-खौफ खाये चंदों को !!
भूख शैतान की भी खाला है ! जिसने उलझन में सबको डाला है !!
Tuesday, December 7, 2010
वलवले
जब दूर थे, तो मिल लिया, करते थे ख्वाब में !
अब साथ हैं तो, पास से, मिलना मुहाल है !!
गुजरे जो दिन फ़िराक के, वो थे कमाल के !
है आज-कल जो हाल, वो किस्मत की चाल है !!
जब पास थे तो, प्यार की न कद्र कर सके !
अब दूर हैं तो, प्यार को पाने की प्यास है !!
अब साथ हैं तो, पास से, मिलना मुहाल है !!
गुजरे जो दिन फ़िराक के, वो थे कमाल के !
है आज-कल जो हाल, वो किस्मत की चाल है !!
जब पास थे तो, प्यार की न कद्र कर सके !
अब दूर हैं तो, प्यार को पाने की प्यास है !!
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